चंद्रमा मूल नक्षत्र में

 शनिवार, चंद्रमा मूल नक्षत्र में..... शनि काल है, मूल जड़ (root) है.....

"जैसे ही बाहरी घट गिरा, जड़ें स्पष्ट प्रकट हो गईं"
जड़ें एक जटिल व्यवस्था को दिखाती हैं जोकि बीज का उर्ध्वगामी होने के लिए स्वयं स्थापित की गई व्यवस्था है। जड़ें न केवल वृक्ष को स्थापित करती हैं, जड़ें संपूर्ण वृक्ष को पोषित भी करती हैं.....
आज की सांसारिक व्यवस्था पूरी तरह सतही (surfaced) है जिसने मनुष्यों को उनकी "मूल प्रकृति"- सत, प्रेम, आनंद, करुणा, शांति, "मूल सभ्यता"- दिव्य ईश्वरीय नियमों के अनुसार पार्थिव जीवन यापन करना, "मूल जाति"- दैवी प्रकृति, "मूल विद्या"- अध्यात्म विद्या, षड विद्या, वर्ण विद्या, स्वर विद्या, ज्योतिष विद्या, अंक विद्या इत्यादि, सब से पूरी तरह से दूर कर दिया है.....
नकली बैद्धिकता (artificial intelligence) ने मनुष्यों को एक सपाट और रैखिक (linear) जीवन शैली, वाणी, व्यवहार और सोच में बांध दिया है जिससे वे स्वयं के और, किसी भी अन्य व्यक्ति, विषय और वस्तु के "मूल" आधार की व्यवस्था को देखने की क्षमता को खो चुके हैं क्योंकि मनुष्य बाहरी घट (pot) को देखने में व्यस्त कर दिया जा चुके हैं जोकि इस त्रिगुणात्मक जगत (3D world) में एक आयाम (1D) में रहने का प्रशिक्षण (training) है ताकि मानुषी जीवात्माएं बहुआयामी (multidimensional) लोकों को कभी प्राप्त न कर सकें, वे केवल इसी लोक में या इससे नीचे के लोकों में गिरते रहें.....
"ना जड़ दिखे और ना अपने मूल को पहचान सकें"
यही जड़ें ऊपर की ओर भी हैं - "ऊर्ध्वमूलं", जोकि एक लोक को स्थापित करती और इस वृक्ष की शाखाएं दूसरे लोकों में जाती हैं..... 1D/2D जीवनशैली मनुष्यों को केवल समय में बांध कर रखती है क्योंकि "समय का काम है सीमित करना" और, मनुष्यों को अपनी मूल प्रकृति, मूल सभ्यता, मूल जाति और मूल विद्याओं को सीखना और उनका संरक्षण करना सीखने होगा क्योंकि समय में ये सब लुप्त हो चुका था/है और समय से ये पुनः उदय हो रहा है/होगा.....वि



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